नियमित टीकाकरण कार्यक्रम को बनाएं प्रभावी। सीएमओ

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सीएमओ ने किया एएनएम के प्रशिक्षण कार्यक्रम का अवलोकन

कहा – एएनएम लक्ष्य के सापेक्ष शत-प्रतिशत बच्चों व गर्भवती का टीकाकरण सुनिश्चित कराएं

अनंत पत्र

वाराणसी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ संदीप चौधरी ने राष्ट्रीय नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत एएनएम (सहायक नर्स दाई) को दिये जा रहे प्रशिक्षण का मंगलवार को अवलोकन किया। सीएमओ शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) शिवपुर पहुंचे। वहां उन्होंने एएनएम से बातचीत की और टीकाकरण के महत्व को समझाया साथ ही इसे प्रभावी बनाने को दिशा निर्देश दिये। 26 दिसंबर से शुरू हुआ प्रशिक्षण कार्यक्रम 23 जनवरी तक चलेगा। शिवपुर व दुर्गाकुंड सीएचसी पर संचालित प्रशिक्षित में अब तक 140 एएनएम को प्रशिक्षित किया जा चुका है। शेष 140 एएनएम को भी प्रशिक्षित किया जाएगा।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि नगरीय व ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों व गर्भवती महिलाओं के लक्ष्य के सापेक्ष शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित कराएं। टीकाकरण के प्रति उदासीन परिवार को प्रेरित कर बच्चों व गर्भवती का टीकाकरण सुनिश्चित कराएं। घनी व मलिन बस्तियों, दूर दराज के क्षेत्रों, घुमंतू परिवारों के बच्चों का टीकाकरण करने के लिए आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि गांवों की तुलना में नगरीय इलाके में व्यवस्थित व बेहतर रणनीति बनाने की बेहद आवश्यकता है। नगर की सभी पीएचसी, वार्ड व मोहल्ला के अनुसार एएनएम का क्षेत्र तय किया जाएगा। घर-घर जाकर हेड काउंट सर्वेक्षण हो। इसके बाद बच्चों व गर्भवती की ड्यू लिस्ट तैयार की जाए। टीकाकरण से छूटे बच्चे व गर्भवती को ट्रैक किया जाए। बुधवार व शनिवार को होने वाले नियमित टीकाकरण सत्र व छाया नगरीय स्वास्थ्य स्वच्छता एवं पोषण दिवस (यूएचएसएनडी) सत्रों तक बच्चों व गर्भवती को लाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं की ओर से घर-घर भ्रमण कर एवं पारस्परिक संपर्क कर सूचना दी जाएगी। आशा कार्यकर्ताओं की ओर से घर-घर बुलावा पर्ची वितरित कर टीकाकरण के लिए प्रेरित किया जाए।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (प्रतिरक्षण) डॉ एके मौर्य, डॉ एके पाण्डेय, डॉ यतीश भुवन पाठक, डॉ मनोज दुबे, डॉ अभिमन्यु सिंह,डीएचईआईओ हरिवंश यादव व डिप्टी डीएचईआईओ कल्पना सिंह के द्वारा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। डॉ एके मौर्या ने कहा कि जन्म से लेकर पाँच वर्ष तक के बच्चों में बाहरी संक्रमण का खतरा अधिक होता है। इसलिए जन्म पर बर्थ डोज़ के साथ ही डेढ़ माह, ढाई माह, साढ़े तीन माह, नौ माह पर, 16 से 24 माह मे और पाँच वर्ष पूर्ण होने पर सभी टीकेसमय से लगवाएँ। इसके अलावा 10 व 16 वर्ष की आयु पर (टिटनेस-डिप्थीरिया) टीडी का टीका जरूर लगवाएँ। उन्होंने बताया कि नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चों को 11 बीमारियों से बचाव के लिए टीके लगाये जाते हैं जिनमें डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस, पोलियो, टीबी, हेपेटाइटिस-बी, हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप-बी, निमोनिया, डायरिया रोटा वायरस और खसरा-रूबेला (एमआर) शामिल हैं। गर्भवती को टिटनेस-डिप्थीरिया (टीडी) का टीका लगाया जाता है।

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