जैविक खेती का प्रभाव जानने के लिए जैविक क्लस्टरो का होगा मृदा परीक्षण

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उप कृषि निदेशक ने सर्विस प्रोवाइडर व एडीओ कृषि को दिये निर्देश

अनंत पत्र

वाराणसी । जनपद में संचालित नमामि गंगे योजना ,पीकेबीवाई योजनान्तर्गत जैविक खेती कार्यक्रम का इम्पैक्ट जानने के लिए अब जनपद के सभी विकास खण्डों में गठित जैविक क्लस्टरों में चयनित किसानों के मिट्टी की जांच करायी जायेगी।सम्बंधित सर्विस प्रोवाइडर व एडीओ कृषि को उक्त आशय से सम्बंधित पत्र जारी करते हुए उप कृषि निदेशक अखिलेश कुमार सिंह ने निर्देशित किया है कि सभी जैविक क्लस्टरों में चयनित किसानों के खेतों की मिट्टी की जांच अनिवार्य रूप से करायी जाय जिससे योजना प्रारंभ होने से पहले एवं योजना संचालित होने के लगभग तीन वर्ष बाद मिट्टी में जीवांश कार्बन की स्थिति का पता लगाया जा सके।उन्होंने जनपद के मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में जनपद में गठित सभी जैविक क्लस्टरों के किसानों के खेत की मिट्टी की जांच कराने का निर्देश दिया है।
क्या है जीवांश कार्बन-
मिट्टी में जीवांश कार्बन का वही महत्व है जैसे हमारे शरीर में खून का।जिस प्रकार मनुष्य का खून समाप्त होने पर उसके जीवित रहने की संभावना समाप्त हो जाती है उसी प्रकार मिट्टी में जीवांश कार्बन की मात्रा कम हो जाने से मिट्टी का स्वास्थ्य खराब हो जाता है।कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो स्वस्थ्य मिट्टी में जीवांश कार्बन की मात्रा कम से कम दशमलव 8 फीसदी होनी ही चाहिए लेकिन विगत वर्षों में वाराणसी जनपद की मृदा में जीवांश कार्बन की मात्रा दशमलव पांच फीसदी से भी कम हो गयी थी जिससे मृदा स्वास्थ्य का संकट उत्पन्न हो गया लेकिन अब जैविक खेती कार्यक्रम चलाये जाने के पश्चात जनपद की मृदा में जीवांश कार्बन की मात्रा में बुद्धि हुई है।कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जिस मृदा (मिट्टी) में जीवांश कार्बन की मात्रा जितनी अधिक होगी वह मृदा उतनी ही अधिक उपजाऊ व स्वस्थ होगी।

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