दिव्यांशु हरहुआ ब्लाक के अंतर्गत जन्मजात मोतियाबिन्द का पहला बच्चा

अनंत पत्र
वाराणसी। जनपद में स्वास्थ्य विभाग मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ संदीप चौधरी के निर्देशन में बच्चों के स्वास्थ्य लाभ के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इस क्रम में हरहुआ ब्लॉक के अंतर्गत राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम नोडल मेडिकल ऑफिसर डॉ अब्दुल जावेद के देखरेख में प्राइमरी स्कूल तारापुर पहुंची। वहां सभी बच्चों की स्क्रीनिंग हो रही थी, तभी स्क्रीनिंग के दौरान कक्षा एक का 7 वर्षीय बच्चा जिसका नाम दिव्यांशु शर्मा था मिला। दिव्यांशु की मां का नाम अनूप कुमारी तथा पिता का नाम आशीष शर्मा था। दिव्यांशु शर्मा को बचपन से ही आंख से नहीं दिखाई दे रहा था इसको प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हरहुआ बुलाया गया, डॉक्टर ने देखने के बाद बताया कि दिव्यांशु शर्मा को जन्मजात मोतियाबिंद (कंजेनाइटल कैटरेक्ट) है। यह एक जन्मजात बीमारी होती है, लेकिन राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की हरहुआ की टीम ने इसकी सारी जांच पड़ताल करवा कर सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय, चित्रकूट भेजकर सफल ऑपरेशन सोमवार को करवाया|
अब दिव्यांशु शर्मा को अच्छे से आंख से दिखाई दे रहा है आज आरबीएसके की टीम दिव्यांशु शर्मा के घर पहुंची और दिव्यांशु के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली और उसको उचित सलाह दी। दिव्यांशु शर्मा को आँख की रोशनी मिलने की जानकारी जब खंड शिक्षा अधिकारी पंकज कुमार यादव, बेसिक शिक्षा अधिकारी अरविंद पाठक को बताई गई तो उन लोगों ने आरबीएसके हरहुआ की टीम को बहुत-बहुत बधाई दी और बोला कि एक बच्चे को आंख की रोशनी मिल जाने से उसका भविष्य अंधकार से उज्जवल भविष्य की तरफ बढ़ गया| यह आरबीएस टीम की बहुत बड़ी कामयाबी है, आरबीएसके की टीम में डॉक्टर अरविंद कुमार, विनोद कुमार मौर्य तथा नदीम अली थे। इनके प्रयासों से ही दिव्यांशु को आँख की रोशनी के साथ नई जिंदगी मिली।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. संयय राय ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग बच्चों के इस तरह की जन्मजात बीमारियों चाहे वह जन्मजात मोतियाबिन्द हो, कटे होंठ और तालू की समस्या हो सभी बीमारियों पर कुशलतापूर्वक काम करके बच्चों को नई जिंदगी दे रहा है| यह हरहुआ ब्लाक के अंतर्गत जन्मजात मोतियाबिन्द का पहला बच्चा है| आने वाले समय में भी हमारा प्रयास रहेगा कि इस तरह की बीमारियों से ग्रसित कोई भी बच्चा मिलता है तो उसका इलाज आरबीएसके टीम की देखरेख में तत्काल किया जायेगा।