दिवानी न्यायालय के आदेश को कहा फर्जी, चार घंटे लॉकप में बैठाए रखने के बाद छोड़ा
अनंत पत्र
वाराणसी। शासन के लाखों प्रयास के बाद भी पुलिस अपने रवैये से बाज नहीं आ पा रही। शान्ति भंग की धारा की आड़ में लोगों के दिल में जगह बनाने के बजाय नफरत का बीज बोने का काम पुलिस ज्यादा करती नजर आ रही है। कुछ ऐसा ही मामला लोहता थाना क्षेत्र के मथुरापुर (भरथरा) गांव से आया है। पीड़ित के अनुसार इसका संज्ञान वरिष्ठ अधिकारियों को दिया गया है। इलाकाई पुलिस द्वारा दीवानी कोर्ट के आदेश के कागजातो को भी फर्जी बताया जा रहा है।
पीड़ित संदीप पटेल के अनुसार गांव में स्थित आराजी नंबर 301 पर बाप दादा के जमाने से वर्षो पुर्व से काबिज चले आ रहे है। जिस पर वे निर्माण करा रहे थे कि पुलिस ने काम रोक दिया। और सारे कागजात दिखाने के बाद भी चार घंटे लॉकप में बैठाए रही। जब पीड़ित ने पेपर दिखाने की बात की तो बेवजह धौंस दिखाने लगी। जब पीड़ीत ने काबिल पुलिस अधिकारी को बताया कि उक्त आराजी पर बकायदा वादी प्रतिवादी के बीच सिविल जज (जू.डि.) के यहां समझौता/सहमति भी हुआ है। इसके परिपेक्ष्य में अपर सिविल जज (पंचम) के यहां से आदेश भी पारित है और आदेश में कहा गया है कि उक्त समझौता भविष्य में उस आराजी का अभिन्न हिस्सा होगा। पीड़ीत के पास और भी चकबंदी न्यायालय सहित अन्य कोर्ट के पेपर भी हैं लेकिन स्थानीय पुलिस सुनने को तैयार ही नहीं है। रविवार को जब वह अपने जमीन पर निर्माण कार्य करा रहा था तो प्रतिवादी बाबूलाल के परिजनों ने 112 डायल कर काम को रोकवा दिया गया। दोनो पक्षों को जब लोहता थाने पर लाया तो स्थानीय पुलिस ने न्यायालय के कागजात को भी फर्जी कह डाला और चार घंटे पुलिस लॉकप में बैठाया गया।
उक्त बाबत पुलिस की ओर से बताया गया कि दोनों पक्षों को आगामी शनिवार को थाने पर अपने-अपने पेपर लेकर बुलाया गया है। जो सही होगा उसे न्याय दिया जाएगा।