

अनंत पत्र
वाराणसी। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रणजीत सिंह उर्फ बाबाजी की 37 वीं पुण्यतिथि पर शुक्रवार को स्मृति दिवस का आयोजन शिक्षक नेता सनत कुमार सिंह के नेतृत्व में भट्ठी गांव में मनायी गयी।
बाबाजी के चित्र पर माल्यार्पण कर वक्ताओं ने कहा कि रणजीत सिंह उर्फ बाबाजी नौकरी छोड़कर आजादी की लड़ाई में कूद पड़े। 1922 में 1930 में 1932 में 1947 व 1942 के आंदोलनों में कुल पांच बार जेल गए। काशी विद्यापीठ ब्लाक मुख्यालय पर स्थित कीर्ति स्तंभ में उनके नाम का अंकन व सन् 1972 में भारत वर्ष के तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा स्वतंत्रता के 25 वें वर्ष पर ताम्रपत्र भेंट कर सम्मान प्रदान किया गया।
आजादी की लड़ाई में पांच वर्ष की अविस्मरणीय जेल यात्राओं में उन्हें भारी यातनाओं के साथ -साथ तीन वर्ष का सश्रम कारावास व 75 रूपया का जुर्माना भी देना पड़ा था। जेल के अंदर डा0 संपूर्णानंद, लोकबंधु राजनारायण , पंडित कमलापति त्रिपाठी, निहाला सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के आदर के पात्र रहे।
इस दौरान उत्तर प्रदेशीय शिक्षक संघ काशी विद्यापीठ अध्यक्ष के अध्यक्ष सनत कुमार सिंह, पूर्व राज्यमंत्री मनोज राय धूपचंडी, पूर्व रोहनियां विधायक सुरेंद्र नारायण सिंह, श्री दंडी स्वामी अनंतानंद सरस्वती, पूर्व ब्लाक प्रमुख रमाकांत सिंह मिंटू, सपा जिलाध्यक्ष सुजित यादव आदि थे।