फाइलेरिया के 20 रोगियों को प्रदान की गई एमएमडीपी किट

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प्रभावित अंगों व घाव की नियमित साफ-सफाई के तरीके बताए

देखभाल, प्रबंधन, दिव्यांग्ता रोकथाम व व्यायाम के लिए किया प्रेरित

अनंत पत्र

वाराणसी। राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत नगरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिसिरपुर (काशी विद्यापीठ) पर सोमवार को फाइलेरिया (हाथी पांव) से ग्रसित 20 रोगियों को रुग्णता प्रबंधन व दिव्यांग्ता रोकथाम (एमएमडीपी) किट और आवश्यक दवा प्रदान की गई। इसके साथ ही रोगियों को प्रभावित अंगों व घाव की नियमित साफ-सफाई के तरीके बताए गए। इसके अलावा सभी रोगियों खासकर ग्रेड 6 यानि गंभीर फाइलेरिया वाले रोगियों को चौकाघाट स्थित राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज के तीसरे तल्ले पर संचालित फाइलेरिया आईएडी उपचार केंद्र के लिए संदर्भित भी किया गया।
इस मौके पर जिला मलेरिया अधिकारी (डीएमओ) शरत चंद पाण्डेय ने सभी रोगियों को एमएमडीपी किट प्रदान की। साथ ही उन्होंने फाइलेरिया के सभी रोगियों को साफ-सफाई, देखभाल, दिव्यांग्ता रोकथाम एवं सामान्य व्यायाम के बारे में प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि फाइलेरिया ग्रस्त अंगों मुख्यतः पैर की साफ-सफाई रखने से इंफेक्शन का डर नहीं रहता है और सूजन में भी कमी रहती है। इसके प्रति लापरवाही बरतने पर अंग खराब होने लगते हैं। इससे समस्या बढ़ जाती है। इन्फेक्शन को बढ़ने से रोकने के लिए दवा भी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि जिनके हाथ-पैर में सूजन आ गई है या फिर उनके फाइलेरिया ग्रस्त अंगों से पानी का रिसाव होता है। इस स्थिति में उनके प्रभावित अंगों की साफ-सफाई बेहद आवश्यक है। इसलिए एमएमडीपी किट प्रदान की जा रही है। इस किट में एक-एक टब, मग, बाल्टी तौलिया, साबुन, एंटी फंगल क्रीम आदि शामिल हैं। फाइलेरिया रोगी सहायता समूह (पीएसजी) नेटवर्क के सदस्य समुदाय को फाइलेरिया के प्रति जागरूक कर रहे हैं। साथ ही बीमारी से जुड़े मिथक को भी दूर कर रहे हैं।
इस दौरान जिला मलेरिया अधिकारी ने सभी आशा कार्यकर्ताओं और संगिनी को फाइलेरिया (हाथ-पैरों में सूजन और अंडकोषों में सूजन) के कारण, लक्षण, पहचान, जांच, उपचार व बचाव आदि के बारे में विस्तार से बताया। इस मौके पर स्वास्थ्य पर्यवेक्षक अवनिन्द्र मणि, आशा कार्यकर्ता एवं अन्य लोग उपस्थित रहे।
लाभार्थियों के बोल – रामकिशुन (55) ने बताया कि फाइलेरिया से प्रभावित अपने पैर की देखभाल व साफ-सफाई के बारे में जानकारी दी गई। इसके अलावा बैठे-बैठे सामान्य व्यायाम के बारे में भी जानकारी मिली, जिसका वह नियमित रूप से पालन करेंगे। चम्पा देवी (72) ने बताया कि इससे पहले हाथीपांव के बारे में इतना नहीं पता था। डॉक्टर द्वारा दी गई जानकारियों का वह नियमित रूप से पालन करेंगी।
फाइलेरिया क्या है – फाइलेरिया, मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है जिसे समान्यतः हाथीपांव के नाम से जाना जाता है। इसका मच्छर रुके हुये पानी में पनपता है। संक्रमित व्यक्ति को काटकर मच्छर संक्रमित हो जाते हैं। संक्रमित मच्छर स्वस्थ व्यक्ति को काटकर संक्रमित कर देते हैं। इससे हाथीपांव व हाइड्रोसिल का खतरा रहता है।
लक्षण –
• सामान्यतः इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते हैं।
• बुखार, हाथ, पैर में दर्द या सूजन तथा पुरुषों के जननांग में व उसके आसपास दर्द या सूजन
• पैरों व हाथों में सूजन और हाइड्रोसिल (अंडकोषों में सूजन)
रोकथाम व बचाव –

  • सोते समय मच्छर दानी का प्रयोग करें।
  • घर व आसपास साफ-सफाई रखें।

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