एमडीएसआर कार्यक्रम से मातृ मृत्यु दर में होगा सुधार

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104 हेल्थ हेल्पलाइन वेब पोर्टल के माध्यम से सामुदाय स्तर पर हुई मातृ मृत्यु की सूचना दिए जाने पर प्रथम सूचना प्रदाता को मिलेंगे रु. 1000/-

अनंत पत्र
वाराणसी। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ संदीप चौधरी ने बताया कि जनपद में मातृ मृत्यु-दर को कम करने के लिए एमडीएसआर (मैटर्नल डेथ सर्विलांस एंड रिस्पांस) कार्यक्रम और सुमन कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। जिसका मुख्य उद्देश्य मातृ मृत्यु ( स्वास्थ्य इकाई, समुदाय एवं जनपद स्तर पर) की समीक्षा कर उनके कारणों एवं कारकों की विस्तृत जानकारी एकत्र कर महत्वपूर्ण स्तरों में सुधार लाना है। सैम्पल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) 2018-20 के अनुसार उ०प्र० का मातृ मृत्यु अनुपात 167 प्रति 1 लाख जीवित जन्म है, जिसे सत्तत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के अर्न्तगत वर्ष 2030 तक 70 से कम किया जाना अपेक्षित है। इस क्रम में एमडीएसआर में गर्भवती व प्रसूताओं की मौत के कारणों की जाँच की जाती है। वजह समझने के बाद कुपोषण मुक्त करने, त्वरित एंबुलेंस व चिकित्सा सेवाओं में सुधार किया जाता है।
उन्होंने बताया कि ब्लॉक तथा जिला स्तर पर मातृ मृत्यु समीक्षा कर इसकी शत-प्रतिशत रिपोर्टिग पर जोर दिया जा रहा है। 15 से 49 वर्ष की गर्भवती व प्रसूता के मौत के कारणों की रिपोर्टिग आशा करेंगी। यह मौत चाहे अस्पताल में हुई हो या फिर घर पर या रास्ते में। सभी की ऑडिट करते हुये पाई गई कमियों में सुधार किया जाता है| मौत की सूचना के बाद मौत के कारणों की समीक्षा की जाती है। इसका पता लगाने के लिए चिकित्सकों की टीम प्रसूता व गर्भवती के घर जाकर जाँच करती है।
उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं कार्यक्रम के नोडल अधिकारी (आरसीएच) डॉ एचसी मौर्या ने बताया कि सुमन कार्यक्रम के अन्तर्गत 104 हेल्थ हेल्पलाइन वेब पोर्टल के माध्यम से सामुदाय स्तर पर हुई मातृ मृत्यु की सूचना दिए जाने पर प्रथम सूचना प्रदाता को रू0 1,000/- प्रति सामुदाय आधारित मातृ मृत्यु की दर से दिया जायेगा। प्रथम सूचना प्रदाता के अन्तर्गत आशा, आंगनवाड़ी कार्यकत्री, पंचायती राज विभाग, का कोई भी व्यक्ति तथा समुदाय से कोई भी व्यक्ति (स्वास्थ्य विभाग से सम्बन्धित किसी भी अधिकारी / कर्मी को छोड़कर) इस प्रोत्साहन राशि को प्राप्त कर सकते हैं|
डॉ. मौर्या ने बताया कि आशा व एएनएम अपने क्षेत्र में हुई मौत की सूचना पहले एएनएम सेंटर व सीएचसी पर फार्म एक के द्वारा देंगी। फार्म दो में आशा की सूचना ब्लॉक रजिस्टर पर दर्ज की जाएगी। फार्म तीन में अधीक्षक मौत को सत्यापित कर कारणों की प्रथम जाँच करेंगे। फार्म चार में अस्पताल व उपस्वास्थ्य केंद्र पर हुई मौत दर्ज होगी। फार्म पांच भरने की प्रक्रिया मौत के 21 दिन के अंदर पूरी की जाएगी। इसमें चिकित्सक समेत तीन लोग प्रसूता के घर जाकर मौत के कारणों की जाँच करेंगे। फार्म छह में मौत के कारणों की पूरी रिपोर्ट भरी जाएगी।

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