पहने पूरी बांह के कपड़े,करें मच्छरदानी का प्रयोग

अनंत पत्र
वाराणसी। संचारी रोग जैसे डेंगू, मलेरिया, फाइलेरिया, कालाजार, चिकनगुनिया आदि की रोकथाम, नियंत्रण, निगरानी व प्रभावी कार्यवाई करने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी क्रम में शनिवार और सोमवार को मण्डल स्तरीय एक दिवसीय एंटोमोलॉजिकल (कीट विज्ञान) सर्विलान्स प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन डीडीयू राजकीय चिकित्सालय पाण्डेयपुर स्थित मंडलीय अपर निदेशक कार्यालय में किया गया। प्रशिक्षण में वाराणसी मण्डल के सभी जनपद वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर और जौनपुर के स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने प्रतिभाग किया।
मंडलीय अपर निदेशक (चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) डॉ. एमपी सिंह के नेतृत्व में क्षेत्रीय एंटोमोलॉजिस्ट व बायोलॉजिस्ट डॉ. अमित कुमार सिंह ने प्रशिक्षण दिया। इस दौरान मण्डल के चारों जनपद के मलेरिया इंस्पेक्टर, फाइलेरिया इंस्पेक्टर, हेल्थ सुपरवाइजर, बेसिक हेल्थ वर्कर सहित 50 स्वास्थ्यकर्मियों को संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत एंटोमोलॉजिकल सर्विलान्स के लिए प्रशिक्षण दिया गया।
जिला मलेरिया अधिकारी शरत चंद पाण्डेय ने बताया कि ऐसी बीमारियां जो मच्छरों, मक्खियों और पिस्सू आदि के काटने से फैलती हैं, उन्हें वेक्टर जनित रोग कहा जाता है। यह वेक्टर अपने साथ बैक्टीरिया, वायरस और पैरासाइट जैसे पैथोजन कैरी करते हैं, जिनकी वजह से व्यक्ति बीमारियों की चपेट में आ जाता है। इन बीमारियों के सामान्य उदाहरणों में मलेरिया, डेंगू, जीका वायरस और चिकनगुनिया आदि शामिल हैं। इस तरह की बीमारियों में तेज बुखार होता है। इसके अलावा पीड़ित व्यक्ति को शरीर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द की शिकायत भी रहती है। बार-बार सिर दर्द होना, थकान या कमजोरी महसूस होना भी वेक्टर जनित रोग का एक सामान्य लक्षण है। इसके अलावा कुछ मामलों में खांसी और सांस लेने में कठिनाई जैसे सांस संबंधी लक्षण भी नजर आ सकते हैं।
क्षेत्रीय एंटोमोलॉजिस्ट डॉ. अमित कुमार सिंह ने बताया कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य वेक्टर जनित लार्वा उन्मूलन के लिए गतिविधियों और संचरण काल की पूर्व तैयारियों को पूरा करना और उसके सापेक्ष प्रभावी कार्यवाई करना है। प्रशिक्षण में सभी जनपदों को वेक्टर सर्विलान्स के लिए टीम गठित करने का निर्देश भी दिया गया। डॉ. अमित ने वेक्टर जनित सभी बीमारियों जैसे डेंगू, मलेरिया, फाइलेरिया, कालाजार आदि के कारण, पहचान, लक्षण, जांच, उपचार और बचाव के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष के सापेक्ष वर्तमान में मच्छर जनित रोग के संचरण काल के दृष्टिगत जनपद में डेंगू, मलेरिया, फाइलेरिया आदि अन्य बीमारियों के प्रभावित क्षेत्रों (हॉट स्पॉट जोन) में एंटोमोलॉजिकल सर्विलांस कार्य जैसे मच्छरों का घनत्व एवं बुखार से ग्रसित रोगियों की सूचना एवं स्क्रीनिंग कार्य किया जाना आवश्यक है|
इन बातों का रखें विशेष ध्यान-
घरों के आसपास जल जमाव न होने दें,
छत पर एवं घर के अंदर निष्प्रयोज्य डिब्बे, पात्र जिसमें जल एकत्र हो सकता हो उसे खाली कर दें,
कूलर में पानी न रहने दें या हर दूसरे दिन पानी बदलते रहें,
फ्रिज के पीछे प्लेट में पानी एकत्र न होने दें
गमलों, नारियल के खोल, या निष्प्रयोज्य टायर, टंकी को जरूर से साफ करवाते रहें, एवं उनमें पानी एकत्र न होने दें।
मच्छरदानी का प्रयोग अवश्य करें,पूरी बांह के कपड़े पहनें।