वाराणसी। आखिरकार मौसम ने एक बार फिर पलटी मारी और बीते रविवार की रात से रूक रूक कर हो रही हल्की बरसात से सब्जी उत्पादक किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें नजर आने लगी। मौसम के बदलते मिजाज और बरसात से जहां एक ओर रवी की फसलों में गेहूं,जौ,अलसी आदि की फसलों को फायदा होगा तो वहींं सब्जी फसलों को क्षति पहुंचने की बात कही जा रही है।समय से बोयी गयी सरसों की फसल को तो लाभ पहुंचेगा लेकिन देर से बोयी गयी सरसों की फसल में मांहू कीट का प्रकोप हो सकता है।बरसात से सरसों के फूल झड़ेंगे और प्रांगण भी प्रभावित होगा।ऐसे में सरसों के उत्पादन को तगड़ा झटका लग सकता है।
कृषि वैज्ञानिक डा.नरेंद्र रघुवंशी ने बताया कि हल्की बरसात से गेहूं,जौ की फसल को लाभ होगा लेकिन जो किसान गेहूं की सिंचाई कर चुके हैं उनकी फसल अधिक बरसात से पीली पड़ सकती है।
इसी प्रकार बरसात से सरसों के फूल झड़ने से नुकसान होगा लेकिन समय से बोयी गयी सरसों की फसल जिसमें फलियां लग चुकी हैं उन्हें लाभ होगा। फ्लावरिंग स्टेज पर पहुंची चना की फसल को बरसात से क्षति होगी।
डा.रघुवंशी ने बताया कि सब्जी की फसलों में खासतौर पर फूलगोभी,मटर,टमाटर,बैंगन को क्षति होगी।टमाटर व बैंगन में फली छेदक कीड़ों का प्रकोप बढ़ेगा।फूलगोभी के फूलों का रंग बदरंग हो जायेगा।
बोले कृषि रक्षा अधिकारी –
जनपद के कृषि रक्षा अधिकारी वृजेश कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि किसान भाई मौसम साफ होते ही गेहूं व जौ की फसल में यूरिया के साथ माइक्रोन्यूट्रिएंट का प्रयोग करें जिससे फसल को पीला होने से बचाया जा सके।इसी प्रकार मौसम साफ होते ही सब्जी की फसलों को फफूंद जनित रोगों से बचाने के लिए फफूंद नाशी दवाओं का छिड़काव अवश्य करें।फली छेदक कीड़ों से फसल को बचाने के लिए कीटनाशक दवाओं खासतौर पर जैविक कीटनाशकों का प्रयोग करें।