हृदयाघात के दूसरे मरीज को समय से थ्रंबोलिसिस प्रक्रिया से बचाई जान

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जनपद की 17 चिकित्सा इकाइयों में हृदय कक्ष को सुसज्जित कर संचालन किए जाने का कार्य तेज – सीएमओ

अनंतपत्र

वाराणसी। चौबेपुर निवासी 44 वर्षीय सोमरु को बृहस्पतिवार को देर रात दो बजे अचानक सीने में दर्द होने लगा। इसके बाद शुक्रवार सुबह नौ बजे फिर से सीने में दर्द उठा। इसके बाद तुरंत परिवार के सदस्य मरीज को पाण्डेयपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय में उपचार के लिए लेकर आए। वहाँ भर्ती हुये तो कुछ आराम मिलने के बाद उन्हें फिर सीने में तेज दर्द उठा। इसके बाद चिकित्सकों ने तुरंत मरीज की ईसीजी प्रक्रिया शुरू की जिससे उनके नसों में रक्त का प्रवाह ठीक से नहीं हो पा रहा है। इसके तुरंत पश्चात चिकित्सकों की टीम ने थ्रंबोलिसिस की प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान मरीज को 24 घंटे के अंदर लगने तथा रक्त को पतला करने वाला इंजेक्शन लगाया गया। इसके कुछ देर बाद रोगी की हालत सामान्य हो गई। सही समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच गई। इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ संदीप चौधरी ने जानकारी दी।
सीएमओ ने बताया कि हृदयाघात परियोजना (स्टेमी प्रोजेक्ट) के अंतर्गत प्रदेश में वाराणसी, थ्रंबोलिसिस थेरेपी देने वाला पहला जिला कुछ दिन पूर्व बन चुका है। इसी क्रम में शुक्रवार को वाराणसी में हृदयाघात के दूसरे मरीज की ईसीजी और थ्रंबोलिसिस की प्रक्रिया से जान बचाई गई। चिकित्सकों की टीम में एमएस डॉ दिग्विजय सिंह, डॉ मनीष यादव, डॉ परवेज़, डॉ अरुण तिवारी, डॉ अतुल सिंह, स्टाफ नर्स नीतू राय, राजेश, वर्षा सिंह सी फार्मासिस्ट प्रदीप तिवारी ने अहम भूमिका निभाई।
सीएमओ ने बताया कि जनपद की 17 चिकित्सा इकाइयों क्रमशः एसएसपीजी मंडलीय चिकित्सालय, डीडीयू राजकीय चिकित्सालय, एलबीएस चिकित्सालय रामनगर, एसवीएम राजकीय चिकित्सालय भेलूपुर, शहरी सीएचसी दुर्गाकुंड, शिवपुर, चौकाघाट, सारनाथ, काशी विद्यापीठ, ग्रामीण सीएचसी अराजीलाइन, चोलापुर, गंगापुर (पिंडरा), हाथी बाजार (सेवापुरी), बिरांवकोट (बड़ागांव), पुआरीकला (हरहुआ) एवं नरपतपुर (चिरईगांव) पर हृदय कक्ष को सुसज्जित कर संचालित करने का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग और आईसीएमआर के सयुक्त तत्वावधान में पहली बार योजनाबद्ध तरीके से हार्ट अटैक से होने वाली मौतों से निपटने की तैयारी की गयी है। इसके तहत हार्ट अटैक आने या मरीज में हृदयाघात की समस्या दिखाई देने पर उसे थ्रंबोलाइसिस थेरेपी दी जाती है। इस प्रक्रिया से मरीज को करीब 24 घंटे का समय मिल जाता है तथा मरीज नजदीकी बड़े केंद्र पर जाकर आवश्यकतानुसार एंजियोप्लास्टी या अन्य जरूरी उपचार करा सकता है। सीएमओ ने बताया कि जनपद में हृदयाघात परियोजना को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रो धर्मेंद्र जैन के सहयोग से चलाया जा रहा है। बीएचयू ‘हब’ एवं जनपद के राजकीय चिकित्सालय एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ‘स्पोक’ के रूप में कार्य कर रहे हैं।

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